Politics (राजनीति) आज हमारे समाज और देश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस article में चुनाव, नेताओं की राजनीति, सत्ता की होड़, जनता के मुद्दे, झूठे वादे और Vote की ताकत को Shayari और व्यंग्य के अंदाज में दिखाया गया है। यहाँ आपको ऐसी Political Shayari मिलेगी जो नेताओं की चाल, चुनावी माहौल और आम जनता की सोच पर सीधी बात करती है।
इस article का उद्देश्य किसी व्यक्ति या party को target करना नहीं, बल्कि राजनीति के अलग-अलग पहलुओं को simple और interesting अंदाज में सामने रखना है। अगर आपको Politics, Election, Political Shayari, Vote और जनता से जुड़े विचार पढ़ना पसंद है, तो यह collection आपके लिए useful और entertaining हो सकता है।
धन्य भाग हमारे नेता जी पधारे,
पाँच साल बाद आए हमारे द्वारे।
कहते हैं पुरानी बातों को भूल जाओ,
इस बार भारी बहुमतों से इनको जिताओ।
नेता जी दर-दर भटक रहे बेचारे,
धन्य भाग हमारे नेता जी पधारे…
जब बीते सालों का दिखाया उनको आईना,
हर बात हमारी सच्ची उनको भाई ना।
अब मतदाता उनको लग रहे प्यारे,
धन्य भाग हमारे नेता जी पधारे…
नेता जी ने इस बार नई युक्ति अपनाई है,
कई रंग-बिरंगी Lollipop दिखाई है।
दिखा रहे हैं दिन में सबको तारे,
धन्य भाग हमारे नेता जी पधारे…
धन्य भाग हमारे नेता जी पधारे,
पाँच साल बाद आए हमारे द्वारे।
आजकल चूहे मेरे घर में बहुत आने लगे,
मेरे घर को कुतरने लगे, खाने लगे।
दो महीने से kitchen में सजी इकलौती प्याज पर,
जैसे ही उसने नजर मारी,
शौकीन चूहे को देख मेरी छठी इंद्री तुरंत ही जाग गई।
मैंने पूछा, हे कुतरने के कारीगर,
क्यों इतने मनोयोग से खा रहे हो मेरा घर?
चूहे ने पहले एक शब्द तौला,
फिर बड़ी विनम्रता से बोला—
आचार संहिता लग गई है,
और मेरी दौड़ को कुतरने की आदत पड़ गई है।
अब तो मैं चुनाव के बाद ही जाऊँगा,
जब तक तेरा ही कुतरूँगा और तेरा ही खाऊँगा।
मुझे पक्का विश्वास है,
तुम ही मुझे देश कुतरने का मौका दोगे,
और बाद में अपने निर्णय पर अपना सिर धुनोगे।
बड़ी राजनीतिक गहमागहमी, बदल रहा माहौल,
कर्म के जो थे आलसी, पिट रहे हैं ढोल।
जनता अब है जागती, लंबी नींद को तोड़,
खुल जाएगी अब तो मखमल में लिपटे नेताओं की पोल।
लूटा गैरों ने तो अपनों ने भी कोई कसर न छोड़ी,
सोने की चिड़िया की कीमत रह गई चंद कौड़ी।
हाथ फैलाए खड़ा अब यह दानी देश,
निगल गया इस देश को उसके अपनों का ही द्वेष।
अगर अभी भी यहाँ की जनता में थोड़ी भी बुद्धि शेष,
तो करो उपयोग अपने हक का और करो नई ऊर्जा का समावेश।
- जन-जन की पुकार है,
Vote देना अधिकार है! - स्वच्छ मन से योग करो,
मत अधिकार का प्रयोग करो! - जन-जन को चेताना है,
मतदाता को जगाना है! - जिंदा रहो चाहे जान जाए,
Vote उसको दो जो काम आए! - सब लोगों की यही पुकार,
Vote देना है हमारा अधिकार!
अंधेर नगरी, चौपट राजा,
Sonia और Laloo बजाएँ बाजा।
कानून तोड़ने वाले बनाएँगे कानून,
स्वदेश के खातिर लड़ने वालों का बर्बाद हुआ खून।
कुछ दिन पहले गरीब किसानों ने खुदकुशी की,
मौसम हाथ दे गया था।
अब Businessmen अपनी जान देंगे,
बाजार गिर गया है।
लोगों को ऊपर उठाने की तमन्ना नहीं है,
सबको नीचे गिराकर एक बनाने चली है सरकार।
वाह री दुनिया, वाह India,
एक Gandhi ने परदेशियों को बाहर भेजा,
एक Gandhi ने परदेसी को बहू से PM बनाया।
क्या सही है, क्या गलत है,
India Super-Power बनने चली थी,
बनी एक विदेशी सरकार।
आज झुक गया शर्म से सर,
100 करोड़ में एक नहीं, देश चलाने की काबिलियत।
इन गलियों और खाली मैदानों को याद करना कितना अजीब है,
वे रेत के टीले जहाँ हम खेला करते थे और अपनी खाइयाँ खोदा करते थे।
वे किले जो हमने बनाए थे,
वे दुश्मन जिन्हें हमने अपनी कल्पना में बनाया था,
जिन पर अपनी लकड़ी की बंदूकों से निशाना साधते थे।
फिर शाम को घर लौटते थे,
जीत के एहसास के साथ,
सुरक्षित और चैन की नींद सोने के लिए।
और अब चारों ओर मलबे का विशाल विस्तार है,
टूटे हुए और छतविहीन मकान,
उखड़ी हुई पत्थर की दीवारें और धँसे हुए पुल।
कुत्तों के झुंड घूम रहे हैं,
उस आखिरी बचे हुए शिकार की तलाश में।
शाम ढलते ही कोई छिपा हुआ निशानेबाज गोली चलाता है,
और सड़क किनारे के खेतों में
ऐसे फूल खिले हैं जो तोड़े जाने पर विस्फोट कर देते हैं।
बच्चे एक जले हुए मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले तक भटक रहे हैं,
उस चीज की तलाश में जो अब अस्तित्व में ही नहीं है—
एक मोहल्ला,
एक खेल का मैदान,
एक swimming pool या खड़ा हुआ झूला।
पतंग उड़ाने के लिए,
गेंद खेलने के लिए,
या बस एक pigeon को पत्थर मारने के लिए।
और इस पूरी वीरान खामोशी के बीच,
तहखानों और रेत के गड्ढों से
रुक-रुक कर चलती हवा की तरह
कुछ फुसफुसाहटें, ताने और विनती सुनाई देती हैं।
मृत माता-पिता की डाँटती हुई आवाजें,
उन शिक्षकों की सीख,
जो अब वहाँ खड़े नहीं हैं।
उनकी classrooms अब राख और धुएँ में बदल चुकी हैं।
और दूर, उस एक मंडराते aircraft की आवाज के पार,
Paris, Zurich, Prague या London में
बैठे statesmen की बैठक की धीमी गुनगुनाहट सुनाई देती है।
आया election, करो तैयारी,
सज-धज के निकली हर एक सवारी।
Congress की चली जोर से आँधी,
सब खुश हैं, आई Sonia Gandhi।
Laloo Yadav बजा रहा है गाल,
मैं हूँ भारत माँ का असली लाल।
अबला नारी के हाथों में सौंपी लगाम,
Rabri Devi आ रही हैं, करो सलाम।
Mulayam Singh हुए बड़े कठोर,
इनका किसी पर अब न चले जोर।
देखो-देखो ये Mayawati आ गईं,
अपने ही गुरु Kashi को खा गईं।
Janata Dal का लंगड़ा घोड़ा दौड़ा,
बच गए केवल Shri Deve Gowda।
Communist कर रहे हैं left-right-centre,
नाच रहे हैं जैसे bandar।
Jyoti Basu बजा रहे हैं अपना बाजा,
एक दिन जरूर मैं बनूँगा राजा।
बाल ब्रह्मचारी बेचारे Atal Bihari,
इन पर हमेशा नारी पड़ी भारी।
सफेद दाढ़ी वाले बाबा Surjeet,
करवा रहे हैं बुढ़ापे में मिट्टी पलीत।
कब्र में पाँव है और दिल में जोश,
किस party में हैं, ये उनको नहीं होश।
Sushma Swaraj पहुँची Bellary,
लगा दिया Swadeshi बनाम Videshi नारी।
भारत माँ की बेटी Indira की बहू,
चिल्ला रही है, मैं Indian हूँ।
चलता रहेगा ये कुर्सी का खेल,
फिर चाहे Bharat लेने जाए तेल।
भाइयो और बहनो, देना उसको Vote,
जो दे तुमको ढेर सारे Note।
क्योंकि — ये पैसा बोलता है।
यह तो सोचो, सवाल कैसा है,
देश के आज हाल कैसे हैं।
जैसे मजहब निकल नहीं पाते,
साजिशों का वो जाल कैसा है।
आए दिन हादसे होते हैं,
सोचता हूँ ये साल कैसा है।
आपने आग को हवा दी थी,
जान लेता है बेगुनाहों की,
आपका ये कमाल कैसा है।
जल गए तो मरहम कैसा है,
दुश्मनी से क्या हासिल होगा,
दोस्ती के खयाल कैसे हैं।
क्यों आज मैं दुखी हूँ,
मुझे गम किसका सता रहा है।
उस मोड़ पर जो अंधेरा छाया है,
क्यों मुझे वह डरा रहा है।
क्यों ऊँचाइयाँ मेरे मुल्क की
मुझे खोखली दिखाई दे रही हैं।
क्यों वह जो गहरा अंदर समा रहा है,
वह है मेरी ज़मीं का दिल,
जो आज दुख मना रहा है।
नोच रहे हैं जमाने वाले,
हर एक अपना जीवन सँवार रहा है।
मेरे मुल्क का क्या होगा ऐ जान,
मेरा भारत दुखी है, दुख मना रहा है।
- Mahatma Gandhi ने freedom struggle को mass movement बनाया।
आइए development को भी mass movement बनाएं। - Mahatma Gandhi ने cleanliness से कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने हमें freedom दिलाई। हमें उन्हें tribute देते हुए Clean India बनाना चाहिए। - Ahmedabad में एक autorickshaw की कीमत 10 रुपये प्रति km है।
India का mission to Mars सात रुपये प्रति km में पूरा हुआ। - जब 125 करोड़ लोगों ने मुझे अपना आशीर्वाद दिया है, तो यह God के आशीर्वाद जैसा है। निराश होने का कोई कारण नहीं है। India बहुत तेजी से progress करेगा और हमारे youth के skills India को आगे ले जाएंगे।
- हम एक youthful nation हैं, जिसकी culture बहुत पुरानी है।
- देश में hope और enthusiasm का माहौल है। India change चाहता है। हो सकता है आपने 2014 में Vote न दिया हो, लेकिन जब results की counting हो रही थी, मुझे यकीन है कि आप सोए नहीं होंगे और आपने celebration किया होगा।
- Elections जीतना किसी post या chair के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक responsibility है। पद संभालने के बाद से मैंने 15 मिनट की vacation भी नहीं ली है।
- लोग पूछते हैं कि आपका vision क्या है, आपका big vision क्या है?
मैं कहता हूँ, भाई, मैं यहाँ tea बेचकर पहुँचा हूँ।
मैं एक simple और Chhota आदमी हूँ। मुझे simple और small tasks पर focus करना पसंद है। मैं little guy के लिए big things करना चाहता हूँ।
India में boredom छा गया!
Elections खत्म हो गए!
Modi अपने काम में busy हैं,
Rahul Gandhi कोई interviews नहीं दे रहे हैं।
किसी AAP guy को slap नहीं पड़ा,
कोई IPL match भी नहीं है।
ऐसे थोड़ी न चलता है देश year!!!!
वो मौतों का खेल खेलते हैं, बस राजनीति चमकाने को,
वो जनता को गोट समझते हैं, अपनी शतरंज बिछाने को।
वो क्या जानें जनता की पीड़ा,
जो जनता को केवल मोहरा समझें, अपने मतलब के लिए पिटवाने को।
India की राजनीति में मचा हुआ घमासान है,
Lok Sabha की सीट ही जैसे हर नेता का अरमान है।
Ticket पाने की होड़ में रिश्ते-नाते भूल रहे हैं,
पुरानी party छोड़कर नए गठबंधन जोड़ रहे हैं।
Maharashtra हो या Bihar, हर रिश्ते में पड़ी दरार,
Vote पाने की चाह में कर रहे एक-दूजे पर वार।
आजकल हर जगह वोटों के भिखारी निकल पड़े हैं,
कुटिल राजनीति के मँझे हुए खिलाड़ी निकल पड़े हैं।
गलतियों का दोष औरों पर मढ़ने का जो चलन है,
उसे निभाने के लिए बहुत से अनाड़ी निकल पड़े हैं।
जनता को वो झूठे वादे अब फिर से मिलने वाले हैं,
“हम जनता के सेवक हैं” के झाँसे फिर से मिलने वाले हैं।
दुनिया की सारी सुख-सुविधाएँ अब जनता की हैं,
सावधान जनता, अब वोटों के भिक्षुक मिलने वाले हैं।
कितने ही वादे करवा लो, नेताओं का क्या जाने वाला,
अभी जैसा चाहो उन्हें नचाओ, उनका क्या जाने वाला।
कुछ दिन और बचे हैं, जितनी चाहो खुशी मना लो,
फिर तो रोना ही रोना है, ईश्वर भी नहीं बचाने वाला।
मिलते रहे हैं मंत्री ऐसे,
देखो तो ज़रा ये देश को मंतर रहे हैं कैसे।
चुनाव में खड़े हैं संत्री ऐसे,
देखो तो ज़रा, जैसे देश का पहरा ये ही दे रहे हों जैसे।
कुछ तो हैं ठेकेदार ऐसे,
चले हैं लेने ठेका पाँच साल का देश का जैसे।
दिखा रहे हैं चाँद ऐसे,
माँगते हैं कटोरा लेकर वोटों की भीख जैसे।
दिखा रहे हैं झाड़ू ऐसे,
निकल पड़े हों देश को साफ करने जैसे।
खिला रहे हैं कमल ऐसे,
कीचड़ की चाय पिलाने देश को निकले हों जैसे।
दिखा रहे हो पंजा ऐसे,
जैसे देश का दम घोंटने को जकड़ लिया हो।
मिलते रहे हैं मंत्री ऐसे,
देखो तो ज़रा ये देश को मंतर रहे हैं कैसे।
काश मिल जाए इस देश को मंत्री ऐसे,
जैसे Ram ने भी कभी देश चलाया था।
Vote के खातिर निकले हैं,
कुछ सौदागर लेकर बंडल नोटों के।
बिकती है हर चीज यहाँ,
खरीदार हैं यहाँ कुछ नेता वोटों के।
भ्रष्टाचार को भ्रष्टाचार के नाम से ही बेच रहे हैं,
काले धन के ये व्यापारी हैं वोटों के।
गरीबी वो क्या मिटाएँगे? मिटाकर गरीबों को,
जमीन भी बेच खाई, ये सौदागर हैं वोटों के।
Vote के खातिर निकले हैं,
कुछ सौदागर लेकर बंडल नोटों के।







